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वैसे कुछ लोगो को ये सवाल काफी अटपटा लग सकता है की इंटरनेट के विकास से क्या मतलब है, लेकिन थोडा गहराई से सोचा जाए तो ये सवाल काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. इस पोस्ट में आज हम इसी बारे में बात करने वाले है. सबसे पहले आपको बता दूं की मार्च 1989 में इंटरनेट यानी WWW (वर्ल्ड वाइड वेब) की शुरुआत दो लोगो – टिम बर्नर्स ली और रोबर्ट साइलाऊ ने साथ मिलकर की थी

दोस्तों हमारा आज का यह पोस्ट आप सभी के लिए पढ़ना बहुत ज़रूरी है | क्योंकि इसमें आप घर बैठे अपने मोबाइल से यह पता करना सीखेंगे कि आपके आधार कार्ड पर कितने जिओ के सिम चल रहे हैं | साथ ही साथ आप इससे यह भी पता लगा सकते हैं कि आपकी आईडी पर कौन से जिओ नंबर किस मोबाइल पर इस्तेमाल हो रहे हैं | मतलब की आपके आधार कार्ड पर कितने जिओ के सिम Activated हैं और वो नंबर कौन-कौन से हैं |

एक बार यह पता करने के बाद आप यह जान सकते हैं कि आपकी आईडी पर इस्तेमाल होने वाले जिओ के सिम, आपके परिवार वाले चला रहें हैं या फिर कोई और | यह पता कर लेने के बाद यदि आपको ऐसा लगता है की आपके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हो रहा है | तो आप उसके खिलाफ़ FIR दर्ज करवा सकते हैं और भविष्य में होने वाली किसी भी illegal Activity से बच सकते हैं |


यह काम करने के लिए आपके मोबाइल में MyJio App का होना ज़रूरी है | साथ ही साथ आपके पास एक Jio Number भी होना ज़रूरी है, जो की आपकी ID से Activated हो | क्योंकि उसी Jio Number की मदद से आप MyJio App में Login कर पाएँगे | और फिर अन्य Jio Numbers को MyJio App में देख पाएँगे |

यदि आपके मोबाइल में MyJio App नहीं है तो पहले उसे install कर लें और फिर निचे दिए गए Steps को Follow करें |

How to Check How Many Jio Sim are Activated on My Aadhaar Card -

Step 1. सबसे पहले आपको अपने Jio Number से MyJio App में Login करना होगा |

Step 2. इसके बाद आपको Link New Account के आगे लिखे 1 yet To be linked पर Click करना होगा |

यदि आपकी ID से दूसरा Jio Number Activated होगा, तभी आपको Link New Account के आगे कुछ लिखा दिखेगा |

Step 3. अगली स्क्रीन में आपको वो सारे Jio Numbers दिख जाएँगे, जो की आपकी ID पर चल रहें होंगे |

साथ ही साथ वो जिओ नंबर जिस मोबाइल में लास्ट बार इस्तेमाल हुए होंगे वो भी आपको यहाँ दिख जाएँगे |

तो इस तरह से आप यह आसानी से पता लगा सकते हैं की - How Many Jio Sims are Activated on Your Aadhaar Card.

उम्मीद करते हैं की अब आप समझ गए होंगे - How to Check How Many Jio Sim are Activated on My Aadhaar Card.



How to Check How Many Jio Sim are Activated on My Aadhaar Card (आपके आधार पर कितने JIO सिम हैं) -


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यदि आपका भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में अकाउंट है तो आप घर से ही आधार कार्ड नंबर को बैंक अकाउंट के साथ लिंक कर सकते हैं। भारत सरकार AEPS यानी “आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम” लॉन्च कर चुकी है। इसके बाद अपने बैंक खाते को आधार से जोड़ कर किसी भी स्थान पर अपने फिंगर प्रिंट आधारित आधार कार्ड वेरिफिकेशन से बिना डेबिट कार्ड के भी पेमेंट करने की सुविधा आप प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि सरकार अब आधार कार्ड को बैंक अकाउंट से लिंक करवाना अनिवार्य भी कर चुकी है। हम बता रहे हैं बैंक अकाउंट से आधार को लिंक करने की सबसे आसान प्रॉसेस।



ये है प्रोसेस :

STEP 1 -


STEP 2 -




STEP 3 -



STEP 4 -






STEP 5 -

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सरकार ने 12 डिजिट के आधार नंबर को सिम कार्ड से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है। 6 फरवरी 2018 इसकी आखिरी तारीख होगी। इस तारीख तक जो भी फोन नंबर आधार से लिंक नहीं करवाए जाएंगे, उन्हें डीऐक्टिवेट कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने आधार से बैंक अकाउंट्स और मोबाइल नंबरों को जोड़ने पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया है। उसने फैसला संविधान बेंच पर छोड़ दिया था। पिछले कुछ दिनों में सरकार ने लिंकिंग प्रक्रिया को और आसान भी कर दिया है। देखें वे 8 बातें, जो इसके बारे में आपको पता होनी चाहिए...




1. दिसंबर से लिंकिंग के लिए OTP इस्तेमाल कर सकेंगे मोबाइल यूजर

ग्राहकों को राहत देते हुए यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ने ऐलान किया है कि वे आधार नंबर को अपने मोबाइल से लिंक करने के लिए 1 दिसंबर के वन टाइम पासवर्ड (OTP) का इस्तेमाल कर सकेंगे। यानी SMS या IVRS कॉल या मोबाइल ऐप के जरिये ग्राहक लिंकिंग रिक्वेस्ट डाल सकेंगे। UIDAI ने एक ट्वीट में लिखा, '1 दिसंबर 2017 के बाद से आप बिना टेलिकॉम सर्विस प्रवाइडरों को अपने बायोमीट्रिक दिए आधार से सिम जुड़वा सकेंगे।

री-वेरिफिकेशन में आधार के अलावा कोई डॉक्यूमेंट जरूरी नहीं

एक मोबाइल सब्सक्राइबर को सिर्फ अपना आधार नंबर और एक्टिव सिम कनेक्शन लेकर जाना होगा और E-KYC री-वेरिफिकेशन करवाना होगा।

ऑनलाइन नहीं करवा पाएंगे रजिस्ट्रेशन

मोबाइल सब्सक्राइबर इसे ऑनलाइन नहीं कर पाएंगे। यानी अगर आपके पास कोई इंटरनेट लिंक आए जो मोबाइल को आधार से जुड़वाने का दावा करे, तो उसके झांसे में ना आएं।

मुफ्त होगी आधार-मोबाइल लिंकिंग

आधार और मोबाइल को जोड़ने के लिए आपको कोई फीस नहीं देनी होगी। यह बिल्कुल मुफ्त होगा।

बुजुर्गों के लिए घर तक आएंगी कम्पनियां

टेलिकॉम ऑपरेटरों को आदेश दिया गया है कि उन वरिष्ठ नागरिकों की वेरिफिकेशन करने उन्हें घरों तक जाना होगा जो बीमार हैं या किसी भी तरह से असमर्थ हैं। DoT के मुताबिक वेबसाइट पर लिंक या कोई और तरीका उन्हें जनता को बताना होगा ताकि इस तरह की परेशानी से गुजरने वाले लोग सर्विस रिक्वेस्ट कर सकें।

एजेंट नहीं देख सकेंगे आपकी e-KYC डीटेल

अगर कोई एजेंट आपका बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेसन करवाता है तो टेलिकॉम कम्पनियों को ध्यान रखना होगा कि वह ग्राहकों की पूरी e-KYC डीटेल ना देख सके। एक नई गाइडलाइन के मुताबिक एजेंट के डिवाइस पर कोई डेटा भी स्टोर नहीं होगा। फिलहाल एजेंट ग्राहकों की तस्वीर और उनका e-KYC डेटा देख पाते हैं।



बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन से सभी मोबाइल नंबर करवाने होंगे लिंक

एक से ज्यादा मोबाइल नंबर रखने वाले ग्राहकों को हर मोबाइल कनेक्शन के लिए अलग बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन करवानी होगी।

इससे सुनिश्चित होगा कि आपकी सिम का गलत इस्तेमाल ना हो

मोबाइल नंबरों का आधार के साथ री-वेरिफिकेशन कर सरकार उन यूजरों को पकड़ना चाह रही है जो सिम कार्ड लेने के लिए नकली पहचान का इस्तेमाल करते हैं। कई केस ऐसे सामने आए हैं जहां किसी व्यक्ति के पैन या दूसरे पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर उनका गलत इस्तेमाल किया गया है और कई दूसरे लोगों को उनके नाम पर कनेक्शन बांटे गए हैं। आधार बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन के बाद आपके नाम पर कोई दूसरा व्यक्ति सिम नहीं खरीद सकेगा।

रिलायंस जियो ने 13 नए प्लान अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर लिस्ट कर दिए हैं। ये प्लान पोस्टपेड और प्रीपेड यूजर्स के लिए हैं। पहले जियो की वेबसाइट पर सिर्फ तीन प्रीपेड प्लान लिस्टेड थे, पर अब नए प्लान आ गए हैं। जिसमें जियो ने उसी कीमत में ज्यादा डाटा के साथ प्लान लॉन्च किए हैं। जियो प्रीपेड यूजर्स के लिए 19 रुपए से 4999 रुपए तक प्लान उपलब्ध हैं।



वहीं,पोस्टपेड यूजर्स के लिए तीन प्लान लॉन्च किए गए हैं। इसमें 309, 509, 999 के प्लान हैं। ये प्लान 303 और 499 के प्लान से रिप्लेस किए गए हैं। इन सभी प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान में कॉलिंग, रोमिंग और मैसेज फ्री रहेंगे। इसके साथ ही अब jio का धन धना धन ऑफर सिर्फ जियो प्राइम यूजर्स के लिए ही उपलब्ध है। नॉन प्राइम यूसर्ज सिर्फ 19 रुपए से 149 रुपए के प्लान ले पाएंगे। अगर हायर पैक लेना चाहते हैं तो इन्हें प्राइम मेम्बरशिप लेनी होगी। धन धना धन ऑफर के अनांउसमेंट से पहले ऐसा नहीं था।



Jio के नए प्रीपेड प्लान

नीचे फोटो में देखिये Jio के नए प्रीपेड प्लान










Jio के नए पोस्टपेड प्लान

नीचे फोटो में देखिये Jio के नए पोस्टपेड प्लान






रिलायंस जियो की ऑफिशियल वेबसाइट पर कई ऐसी जानकारी मौजूद हैं जो हर यूजर के काम आ सकती हैं। इन्हीं में से एक है Jio Tunes। कंपनी ने वेबसाइट पर जियो ट्यून को सेट करने की 3 प्रॉसेस बताई हैं। इसमें JioMusic ऐप, SMS और USSD कोड की प्रॉसेस शामिल हैं। इन सभी में JioMusic ऐप बेस्ट है। ऐप का सबसे बड़ा फायदा है कि यूजर यहां पर अपनी पसंद का गाना लाइव सुन सकता है। साथ ही, उस सॉन्ग का कितना हिस्सा जियो ट्यून में सेट होगा, ये सुना जा सकता है।



जियो की ये सर्विस यूजर के लिए पूरी तरह फ्री है। इसके लिए उसे न तो किसी तरह का रिचार्ज करना है और न ही कोई एक्स्ट्रा पेमेंट करना है। हालांकि, जब बात दूसरी कंपनियों की आती है तब वे सर्विस और सॉन्ग का अलग-अलग चार्ज करती हैं। यानी कॉलर ट्यून के लिए कंपनियां 60 रुपए का सब्सक्रिप्शन चार्ज महीनेभर के लिए लेती हैं। साथ ही, सॉन्ग डाउनलोडिंग का चार्ज 30 रुपए होता है। यानी एक कॉलर ट्यून 90 रुपए की होती है।



ध्यान रखे सभी सॉन्ग की नहीं है Jio Tune :


Jio Musis ऐप पर मौजूद सभी सॉन्ग की ट्यून नहीं बनाई जा सकती है। जिस सॉन्ग पर Set as Jio Tune का ऑप्शन आएगा सिर्फ उसे ही यूजर जियो ट्यून में सेट कर सकेगा। लेटेस्ट कैटेगरी के सभी सॉन्ग की ट्यून सेट की जा सकती है। हालांकि, यूजर सॉन्ग सुनने के लिए ऐप का यूज कर सकता है।
























Micro USB Cable Charging Test – अलग-अलग तरह के चार्जर आपकी एंड्राइड डिवाइस को अलग रेट (चार्ज करने की स्पीड) के साथ चार्ज करते है, और कुछ ख़राब या टूटे हुए चार्जर शायद आपकी डिवाइस को उतनी तेज़ी चार्ज नहीं करते जितना की वो दावा करते है |अगर आपको अपनी डिवाइस की चार्जिंग से लेकर कोई समस्या रही है, तो आप जरुर जानना चाहेगे की अपक चार्जर कितने सही तरीके से काम करता है, तो पढ़ते रहिये | इस पोस्ट में आप जान पायेगे की आपका चार्जर आपके फ़ोन या टेबलेट को कितनी इलेक्ट्रिक करंट सप्लाई कर रहा है और साथ ही उसे measure भी कर सकते है |


आपका पहला स्टेप है की आपको प्ले-स्टोर से ये आसान सी एप्प जिसका नाम Amper है को डाउनलोड करके इनस्टॉल करना है, दरअसल ये एप्प आपके लिए इलेक्ट्रिक सप्लाई को measure करेगी | ये एप्प उन सभी एंड्राइड डिवाइस पर काम करेगी जो Android 4.0 या उससे अधिक के version पर काम करती हो | इस एप्प के डेवलपर्स का कहना है की ये एप्प कुछ मॉडल्स जैसे HTC One M7 और M8 पर अच्छे से काम नहीं कर रही |


डाउनलोड और इनस्टॉल करने के बाद इसे open कीजिये, और आप तैयार है testing के लिए |



ऐसे परखें फ़ोन चार्जर की परफॉरमेंस

अपने Charger को कैसे Test करें

इसके लिए आपको अपना चार्जर और उसे plug-in की जगह चाहिए – आप इसे दीवार आउटलेट, किसी कंप्यूटर या किसी पोर्टेबल बैटरी से भी कनेक्ट कर सकते है |अपने चार्जर की capabilities के सबसे accurate measurement के लिए इसे इसकी official USB चार्जर के साथ दीवार आउटलेट से चार्ज करे |

आप इस एप्प से मिलने वाली information को आप उपर इमेज में देख सकते है | ये तक़रीबन 10 सेकंड लेता है आपके फ़ोन के चार्ज को measure करने के लिए, जैसा की आप left वाली इमेज में देख सकते है | दूसरी तरफ right वाली इमेज में settings menu, जिसे आप को देखने की ज्यादा जरूरत नहीं है |

इस एप्प के बॉटम में चल रहे ऐड को हटाने के लिए आपको इसका Pro version खरीदना पड़ेगा, जिसके लिए option दिया हुआ है, इसके लिए आपको ज्यादा नहीं केवल $1.13 ही चुकाने होंगे | इसके Pro version को आप एक ओर reason के लिए खरीद सकते है और वो ये है की इसके Pro version में notification tray के अंदर आपको लगातार आपकी battery info के notification भी मिलते रहेगे |



इस App की Working Details

जब आपका फ़ोन चार्जिंग में नहीं होगा तो ये एप्प orange रंग का text इस्तेमाल करेगा और जब फ़ोन चार्जिंग में होगा तब blue रंग का text इस्तेमाल करेगा | जब चार्जिंग में नहीं होगा तब आप देख सकते है की आपका फ़ोन currently कितनी energy इस्तेमाल कर रहा है | इस energy की मात्रा इस पर निर्भर करती है की आपका फ़ोन उस समय कितने काम एक साथ कर रहा है |

नीचे आप देख सकते है left साइड वाली इमेज में मेरे फ़ोन की brightness को low किया हुआ है, वही दूसरी ओर right साइड वाली इमेज में brightness को high किया हुआ है | दोनों का अंतर आप साफ़ देख सकते है, ज्यादा brightness वाली स्क्रीन ज्यादा बैटरी पॉवर का इस्तेमाल करती है, लेकिन इसमें कुछ दुसरे factors भी है जो इसे प्रभावित करते है, जिसमे background के अंदर apps updating, Wi-Fi और cellular signal strength के साथ और भी दुसरे factors हो सकते है |


इस एप्प में बहोत ही मॉडर्न Lollipop-based design इस्तेमाल किया गया है, जो आँखों के लिए समझना काफी आसान है | लेफ्ट साइड में दिए हुए circular icon पर क्लिक करने पर आपको बैटरी का फुल स्टेटस बताएगा | नेगेटिव नंबर का मतलब आपका फ़ोन डिस्चार्ज हो रहा है, और पॉजिटिव चार्ज दिखायेगा आपका फ़ोन कितना चार्ज हो रहा है | चार्जिंग के दौरान भी ये चार्जिंग वैल्यू mA (मिली एम्पेयर) में दिखता है, जैसे की 600mA या 800mA |



Important Tips

एक बात ध्यान में रखिये अगर आप अपने फ़ोन का नार्मल से ज्यादा इस्तेमाल करते है और वो ज्यादा चार्जिंग मांगता है, तो फ़ोन के चार्जर की टेस्टिंग के दौरान आपको शायद lower number ( कम चार्जिंग गति ) मिले, और ये आपके चार्जर की गलती नहीं कही जा सकती |

इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते है, अगर आपका फ़ोन -240 mA (मिली एम्पेयर) चार्ज का इस्तेमाल कर रहा है और आपका चार्जर 600mA की सप्लाई कर रहा है, तो असल में आपका फ़ोन केवल (600mA – 240 mA) यानी 360mA की रेट से ही चार्ज हो रहा है |






आपको अपने Charger से क्या उम्मीद करनी चाहिए?

आपको इतना तो पता चल गया की आपका फ़ोन किस चार्जिंग रेट से चार्ज हो रहा है और किस रेट से आपका फ़ोन उसे इस्तेमाल कर रहा है, अब आपको इतना पता करना है की क्या ये चार्जिंग रेट सही है ? यानी चार्जर को जिस चार्जिंग रेट के साथ चार्ज करने के लिए कंपनी ने इसे बनाया है क्या ये अभी भी उसी चार्जिंग रेट के साथ चार्ज कर रहा है ?

हर एक चार्जिंग केबल अलग होती है, लेकिन एक तरीका है जिससे आप अपने चार्जर को एक्यूरेट चेक कर सकते है | एक ओर जहां ये एप्प आपको बताती है की आपका फ़ोन कितनी पॉवर से चार्ज हो रहा है तो इस चार्जिंग रेट को आप अपने चार्जर को ओरिजिनल चार्जिंग रेट जो उस पर मैन्युफैक्चरिंग के दौरान लिखी जाती है, से Compare करके पता कर सकते है |

इसके लिए चार्जर के एडाप्टर पर कोई स्टीकर या कुछ और छोटे अक्षरों में प्रिंट किया हुआ होगा, जो की एडाप्टर की specifications होती है को देखना है | नीचे इमेज में आप सफ़ेद स्टीकर में मेरे चार्जर की specifications देख सकते है |


अब आपको इस स्टीकर या प्रिंट में वो जगह देखनी है जहां Output लिखा हुआ हो, उपर फोटो में 1,000mA है | मतलब में उम्मीद करनी चाहिए की ये 1,000mA से चार्ज करेगा, इसमें से वो पॉवर जो मेरा फ़ोन अभी इस्तेमाल कर रहा है को माइनस कर सकते है ( उदाहरण के लिए 240mA-510mA जो फ़ोन के ब्राइटनेस पर निर्भर करता है )

अगर आपका चार्जर उस गति से आपका फ़ोन चार्ज नहीं कर रहा है जैसा की उस पर बताया गया है तो कुछ स्टेप्स है जो आप फॉलो कर सकते है |



ये Adjustments करके Charging Speed बढायें

अगर फ़ोन सही स्पीड के साथ चार्ज नहीं हो रहा है, तो कुछ तरीके है जिनसे चार्जिंग स्पीड को बढ़ा सकते है | उदाहरण के लिए चार्जिंग के दौरान अपने फ़ोन को फ्लाइट मोड में डालिए और स्क्रीन को ऑफ कर दीजिए, जिससे फ़ोन जल्दी चार्ज होगा | अगर आप इतना सब नहीं करना चाहते तो कुछ और टिप्स भी है जिनसे बैटरी को जल्दी चार्ज कर सकते है |

आपको लग सकता है की किसी कंप्यूटर से या किसी दीवार चार्जर से फ़ोन चार्ज करना एक ही बात है तो आप गलत है, दोनों में काफी डिफरेंस होता है | कंप्यूटर उस रेट से चार्ज नहीं कर सकता जितनी तेज़ी से दीवार करता है | नीचे इमेज में आप दोनों का अंतर देख सकते है, लेफ्ट साइड में चार्जिंग स्पीड है जब दीवार चार्जर के साथ चार्ज किया गया, दूसरी ओर राईट साइड में जब कंप्यूटर से जोडकर चार्ज किया गया | दोनों का अंतर आप साफ़ देख सकते है |


ये भी recommend किया जाता है की आप हमेशा उसी चार्जर या चार्जिंग केबल से अपने फ़ोन को चार्ज करे जो खरीदने के समय साथ में दी गई हो, बजाय किसी third-party चार्जर से | क्योकि hardware manufacturer ने उस चार्जर या केबल को उन्ही स्पेसिफिकेशन के साथ पहले टेस्ट किया हुआ होता है, जिससे आपको भी पता होता है की इसमें सही चार्जिंग रेट होगी |




अगर आपका फ़ोन wireless charging को सपोर्ट करता है तो ये कंप्यूटर से चार्ज करने की रेट से भी कम होगा | हालाँकि ये इस्तेमाल में आसान है, लेकिन तब भी काफी स्लो है |

अच्छी चार्जिंग के लिए बैटरी को ठंडा रखे | गर्मी बैटरी के लिए bad news है और अगर बैटरी को लंबे समय तक चलाना चाहते है तो इसे गर्म होने से बचाए | गरम होने पर इसे बाहर निकाल कर ठंडी जगह पर रखे और इससे ये जल्दी भी चार्ज होगी |

आपका चार्जर कैसा काम कर रहा है? अपने रिजल्ट हमे कमेंट करके जरुर बताए |

USB Safely Eject – सभी कंप्यूटर यूजर Safely Remove Hardware मैसेज के बारे में जरुर जानते होंगे, ये मैसेज कंप्यूटर स्क्रीन पर तब दिखाई देता है जब कोई USB डिवाइस जैसे पेनड्राइव या मोबाइल को कंप्यूटर से डिसकनेक्ट करते है |




हालांकि इस मैसेज को देखा सभी लोगो ने है, लेकिन बहुत कम लोग इसके महत्व के बारे में जानते होंगे | इस पोस्ट के जरिए आप जान पायेगे की इस मैसेज का क्या मतलब है और ये कितना महत्वपूर्ण है |



PC से USB Media को Safely हटाना –

अगर आपकी पेन ड्राइव में कोई डाटा कॉपी हो रहा है और उस समय कोई आपसे इसे निकालने को कहे तो आप इसके लिए मना कर देगे | क्योकि आपको पता है की अभी कोई डाटा कॉपी हो रहा है और इसे हटाने पर आपका डाटा corrupt या डिलीट हो सकता है, ये भी सबको पता है |


फिर भी, अगर आपकी USB drive में कोई डाटा कॉपी या पेस्ट नहीं हो रहा है, अचानक अपनी पेन ड्राइव को निकालने से भी आपका डाटा corrupt या डिलीट हो सकता है | ऐसा write caching process के कारण होता है, जो की लगभग सभी ऑपरेटिंग सिस्टम्स इस्तेमाल करते है | इसकी वजह से कोई इनफार्मेशन सीधे आपके USB drive पर नहीं भेजी जाती | बजाय इसके, हो सकता है कुछ इनफार्मेशन पहले आपके कंप्यूटर की RAM में स्टोर हो इसके बाद आपके USB drive पर भेजी जाए |

जब आप कॉपी कमांड से कोई डाटा पेन ड्राइव में कॉपी करते है तो ऑपरेटिंग सिस्टम पहले कुछ requests के fulfill होने का इंतज़ार करता है और उसके बाद उन सभी requests को एक साथ पूरा करता है | इसलिए अचानक से USB drive को हटाने से आपका डाटा डिलीट हो सकता है, भले ही आपकी कॉपी या पेस्ट प्रोसेस शुरू ना हुई हो |



Linux, MacOS और Windows इस पर अलग तरह से प्रतिक्रिया क्यों करते है?

MacOS और Linux-based operating systems में ये व्यवहार ज्यादातर देखा जाता है, जैसा की फोटो में देखा जा सकता है | लेकिन Windows में ऐसा क्यों नही होता ? क्योकि Microsoft के ऑपरेटिंग सिस्टम्स में removable device के लिए write cache feature को disable कर देता है | Windows में आपको परफॉरमेंस improve और quick removal के लिए एक आप्शन दिया होता है, आपको हमेशा उसका इस्तेमाल करना चहिये |


इस आप्शन को आप Device Manager > Disk Drives > Name of drive > Properties > Policies में जाकर एक्सेस कर सकते है | ऐसा भी मुमकिन है की आपके Windows PC में ये quick removal सेटिंग पहले से ही एक्टिवेट हो रखी हो |

दूसरी तरफ Mac और Linux लगभग सभी drives पर write caching का इस्तेमाल करते है | अगर आप Windows में Better Performance option को चुनते है तो आपको भी कुछ ऐसा ही behaviour दिखाई देगा जैसा Mac और Linux में होता है |

Better Performance option को चुनने से Windows डाटा को removal drive में सीधे write (Copy/Paste) करने से पहले cache ( एक तरह की मैमोरी जो RAM का पार्ट होती है) में स्टोर करेगी | साथ ही इसके बाद अचानक USB drive को निकालने पर आपको Safely Remove Hardware warning का मैसेज भी दिखाई देगा |





हमेशा USB Drives को Manually Eject करना चाहिए


अगर आप Windows PC का इस्तेमाल कर रहे है तो शायद आपको Safely Remove Hardware error मैसेज स्क्रीन पर नहीं दिखाई दे | लेकिन Windows डाटा के डिलीट हो जाने पर पूरी इनफार्मेशन provide नहीं करवाता और उसके background में भी अलग-अलग प्रोसेस चलती रहती है | तो ये मुमकिन है की quick removal setting के साथ भी आपका डाटा lose हो सकता है |

इसलिए हमेशा सावधानी के तौर पर अपनी USB drives को manually eject करना चाहिए | चाहे आप किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हो, इसे अपनी आदत बना लीजिए |

अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमें कमेंट करके अपनी राय जरुर बताए |

USB Pendrive Not Showing Files – आजकल पेनड्राइव का इस्तेमाल लगभग वे सभी लोग करते है जो कंप्यूटर या स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करते है | पेनड्राइव का इस्तेमाल डाटा को एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस में ट्रांसफर करने के लिए करते है, लेकिन कई बार ऐसा होता है की किसी पेनड्राइव को कंप्यूटर से जोड़ने पर उसमे कोई फाइल नहीं दिखाई देती, लेकिन असल में उसके अंदर डाटा मोजूद होता है |

ऐसा Virus, Trojon या Malwares के कारण होता है | इससे आपकी पेनड्राइव में कई बार shortcut बन जाते है और ये सारी फाइल्स को Hidden (छुपा) देते है | इससे आपकी पेनड्राइव की फाइल्स पर भी effect पड़ता है |



कई बार आप ये भी सोचते है की ऐसी पेनड्राइव को Antivirus प्रोग्राम से Scan करके उसमे से वायरस डिलीट कर देगे | आपका सोचना तो सही है – इससे वायरस तो डिलीट हो जाएगे, लेकिन इसमें Antivirus आपके डाटा को Recover कर पाता और वायरस के साथ आपकी फाइल्स भी Delete हो जाती है | तो ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए ?

अपना डाटा Delete होने से बचाने के लिए ये स्टेप्स फॉलो कीजिए



USB Pendrive का Hidden डाटा कैसे वापस लाए

  • सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर में Check करे की आपने show windows hidden file को ऑफ तो नहीं कर रखा – अगर ऑफ है तो उसे ऑन कर ले | 
  • उसके बाद भी अगर फाइल्स नहीं दिख रही तो Start Menu में जाकर “cmd” सर्च करके उसे ओपन करे 
  • अब बस उसके अंदर आपको ये कमांड टाइप करके enter बटन दबाना है 
  • attrib -h -r -s /s /d k:\*.*

Note : ध्यान रहे यहाँ पर K की जगह आपको अपनी USB Drive के Letter को लिखना है.


अब आपको 1 से 2 मिनट का इंतज़ार करना है, उसके बाद अपनी पेनड्राइव को खोले | आपको अपना डाटा बिना नाम वाले फोल्डर में मिलेगा, इसलिए सारे फ़ोल्डर्स को चेक करे और अपना जरुरी डाटा मिलने पर उसे रिकवर कर ले |

फेसबुक ने अकाउंट सिक्योरिटी को बढ़ाने के लिए नया Facebook USB key authentication सपोर्ट लांच कर दिया है, इससे आप अपने social account को और ज्यादा secure कर सकते है. USB key के बारे में आपको बता दे की ये pendrive की तरह दिखने वाली device है , जिसके बिना कोई भी आपके account को बिना इसके open नहीं कर सकता.





इन steps से आप Facebook USB key authentication को अपने facebook अकाउंट पर एक्टिव कर सकते है

1 – अपने अकाउंट की setting में जाकर Security टैब को खोले और Setting up extra security को देखे, जिसमे Security keys option होगा


2 – Security keys section में Add Key पर क्लिक करना है, जिससे एक नया डायलॉग बॉक्स खुलेगा


3 – जब डायलॉग बॉक्स खुले तब उसमे आपको अपनी USB key लगानी है और जब USB key में light blink करने लगे तब इसके बटन को दबाना है


4 – एक बार Key add होने के बाद कन्फर्मेशन के लिए अपना पासवर्ड re-enter करना होगा साथ ही उसे कोई मनचाहा नाम देना होगा

5 – प्रोसेस complete होने के बाद आपकी नई Key आपको Security Keys section में दिखाई देगी




अगर आपने पहले physical authentication keys का इस्तेमाल नहीं किया है तो ये बाते ध्यान में जरुर रखे

साथ में Backup Keys रखे : जैसे हर छोटी चीज़ जो आपके पॉकेट या पर्स में होती है उसके गूम हो जाने खतरा होता है, इसलिए आपको Backup Keys जरुर रखनी चाहिए, Facebook आपको security के लिए एक से ज्यादा Keys इस्तेमाल करने की इज़ाज़त देता है |



दुसरे Backup Method भी इस्तेमाल करे : फिलहाल के लिए Facebook के Desktop साइट पर ही USB ऑथेंटिकेशन काम करता है, mobile साइट के लिए NFC-based Keys जैसे की YubiKey Neo का इस्तेमाल कर सकते है. जब तक facebook के mobile साइट में physical keys का सपोर्ट नहीं होता तब तक अपने app और SMS authentication को बैकअप mathod के तौर पर enabled करके रखिए

Facbook का USB authentication जरुरी नहीं है, लेकिन आप इसे एक शुरुआत के तौर पर देख सकते है क्योकि cybercriminals अब लोगो के social media acconts को target कर रहे है | इस पहल से privacy-conscious users को काफी फायदा होगा, शायद जल्दी ही दूसरी social media services भी इसे follow करे |

आज हम जानेंगे What is SEO in Hindi यानि SEO क्या है ? दोस्तों पिछली लेख में हमने जाना था की क्या online पैसे कमाना आसान है ? Blogging भी एक ऐसा platform है जो आपको online से पैसे कमाने का जरिया देता है. simplegyan.com में मैंने आपको blogging से related बहुत सी जानकारियां दी हैं जो आपके blog को सफल बनाने के काफी काम आ सकती है.



लेकिन उन सभी चीजों से भी ज्यादा जरुरी चीज जो blogging के career में सफलता पाने के लिए बहुत ही माइने रखती है वो है SEO. आज की इस पोस्ट में आप जान पायेगे की Search Engine Optimization क्या है और ये किसी Blog या Website के लिए क्यूँ और कितनी जरुरी है?



WHAT IS SEO (IN HINDI) – SEO क्या है?

सबसे पहले SEO का full form है Search Engine Optimization. Search engine क्या है ये हम सभी को पता है. Google पूरी दुनिया का सबसे popular search engine है इसके अलावा Bing, Yahoo जैसे और भी search engine मौजूद है. SEO के मदद से हम अपने blog को सभी search engine पर No.1 position पर रख सकते हैं.


जैसे मान लीजिये हम Google में जाकर कुछ भी keyword type कर search करते हैं तो उस keyword से related जितने भी contents होते हैं वो आपको Google दिखा देता है. ये contents जो हमे नज़र आते हैं वो सभी अलग अलग blog से आते हैं. जो result हमे सबसे ऊपर दिखाई देता है वो Google में No.1 rank पर है तभी वो सबसे ऊपर अपनी जगह बनाये रखा है. No.1 पर है मतलब की उस blog में SEO का बहुत अच्छी तरीके से इस्तेमाल किया गया है जिससे की उसमे ज्यादा visitors आते है और इसी वजह से वो blog मसहुर हो गया है.

ये हमारे blog को Google में No.1 rank पर लाने के लिए सहायता करता है. ये एक तकनीक है जो आपके website को search engine के search result पर सबसे ऊपर रख उसमे visitors की संख्या को बढाती है. आपका website search result में सबसे ऊपर हो तो internet user सबसे पहले आपके site में ही visit करेंगे जिससे आपके site में ज्यादा से ज्यादा traffic होने की संभावना बढ़ जाती है और आपकी income भी अच्छी होने लगती है. अपने website पे Organic traffic बढ़ाने के लिए SEO का इस्तेमाल करना बहुत जरुरी है.




SEO किसी BLOG या WEBSITE के लिए क्यूँ जरुरी है?

आप ने जान लिया की SEO क्या है, चलिए अब जानते हैं की ये blog के लिए क्यूँ जरुरी है. अपने website को लोगों तक पंहुचाने के लिए हम SEO का इस्तेमाल करते हैं. मान लीजिये मैंने एक website बना लिया उसमे अच्छे अच्छे high quality contents भी publish कर दिया लेकिन अगर मैंने SEO का इस्तेमाल नहीं किया तो मेरा website लोगों तक नहीं पहुँच पायेगा और मेरे website बनाने का भी कोई फायेदा नहीं होगा.

अगर हम SEO का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो जब भी कोई user कोई keyword search करेगा तो आपके website में उस keyword से related अगर कोई content मौजूद है तो user आपके website को access नहीं कर पायेगा क्यूंकि search engine हमारे site को ढूंढ नहीं पायेगा ना ही हमारे website के content को अपने database पर store कर पायेगा, जिससे आपके website में traffic होना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा.

इसे समझना इतना भी मुश्किल नहीं है अगर आपने इसे सिख लिए तो अपने blog को बहुत ही बेहतर बना सकते हैं और उसकी value search engine में बढ़ा सकते हैं. इसको सिख लेने के बाद जब उसका इस्तेमाल अपने blog के लिए करते हैं तो आपको उसका result तुरंत नहीं दिखेगा इसके लिए आपको धैर्य रख कर अपना काम करते रेहने होगा. क्यूंकि सब्र का फल मीठा होता है और आपकी मेहनत का रंग आपको जरुर दिखेगा.



SEO कितने प्रकार के होते हैं – Search Engine Optimization Techniques

ये दो प्रकार के होते हैं एक है Onpage SEO और दूसरा है Offpage SEO. इन दोने का काम बिलकुल अलग है चलिए हम इनके बारे में भी जान लेते हैं.


On page SEO

इसका काम आपके blog में होता है. इसका मतलब है की अपने website को ठीक तरह से design करना जो SEO friendly हो. SEO के rule को follow कर अपने website में template का इस्तेमाल करना. अच्छे contents लिखना और उनमे अच्छे keywords का इस्तेमाल करना जो search engine में सबसे ज्यादा खोजी जाती है. Keywords का इस्तेमाल page में सही जगह करना जैसे Title, Meta description, content में keyword का इस्तेमाल करना इससे Google को जानने में आसानी होती है की आपका content किसके ऊपर लिखा गया है और जल्दी आपके website को Google page पर rank करने में मदद करता है जिससे आपके blog की traffic बढती है.

Off-Page SEO

इसमें सारा काम blog के बाहार होता है. इसमें हमे अपने blog का promotion करना होता है जैसे बहुत से popular blog में जाकर उनके article पर comment करना और अपने website का link submit करना इसे हम backlink कहते हैं. Backlink से website को बहुत फायेदा होता है. social networking site जैसे Facebook, twitter, Google+ पर अपने website का attractive page बनाइये और अपने followers बढाइये इससे आपके website में ज्यादा visitors बढ़ने के chances होते हैं. बड़े बड़े blogs में जो बहुत ही मसहुर हैं उनके blog पर guest post submit करीए इससे उनके blog पे आने वाले visitors आपको जानने लगेंगे और आपके website पर traffic आना शुरू हो जायेगा.

आप सब समझ ही गए होंगे के What is SEO in Hindi (SEO क्या है). अगर आपको इस पोस्ट से जुडी कोई और जानकारी चाहिए तो कमेंट करके जरुर बताए.

Online Money – ये तो सभी लोग जानते है की दुनिया में सभी लोग पैसे कमाना चाहते हैं. पैसे कमाना के बहुत सारे रास्ते हैं जैसे किसी अच्छी कंपनी में join करके पैसे कमा सकते हैं या अपना खुद का व्यापर शुरू करके कम सकते हैं, या फिर online से घर बैठे पैसे कमा सकते हैं. पैसे कमाने का जरिया चाहे जो भी हो मेहनत सभी कामो में लगती है. और आपको पैसे भी तभी मिलते हैं जब आप मेहनत करते हैं |



तो आज के इस विषय Online Money में, में आपसे अपना खुद का कुछ experience share करना चाहुगा और आपको ये बताने की कोशिश करुँगा के क्या आप घर बैठे पैसे कमा सकते है? क्या ये इतना आसान है?



ONLINE MONEY – ONLINE पैसा कमाना कितना आसान, कितना मुश्किल?

हम सभी का बचपन से ही सपना होता है की हम अच्छे से पढाई कर बड़े होकर अच्छी नौकरी करेंगे, पैसे कमायेंगे और अपना और अपने माँ बाप का सपना पूरा करेंगे. लेकिन हमे सच तो तभी पता चलता है जब हम अपनी पढाई पूरी कर लेते हैं और नौकरी करने, पैसे कमाने का असली वक़्त आता है. नौकरी के लिए हम हर जगह interview देते हैं, बहुत ही भाग दौड़ करना पड़ता है. बहुत कोशिशो के बाद भी हमे नौकरी नहीं मिलती तो हम अपना खुद का व्यापार शुरू करने के बारे में सोचते हैं.

आप में से बहुत लोगों से सुना होगा की online पैसे कमाना आसान है. अगर आप browser में जा कर search करते हैं की Online Money या Online से पैसे कैसे कमायें तो आपको बहुत सारे results मिल जायेंगे जहाँ आपको बहुत सारे tips बताए गए होंगे की आप अगर ऐसा करेंगे तो आप एक दिन में 100 $, 500 $ कमा सकते हैं वो भी बिना मेहनत के.

मगर ऐसा बिलकुल नहीं होता, जिन लोगों को online पैसे कमाने के बारे में जानकारी नहीं होती वो इन सब चीजों को सच मान लेते है और वास्तव में सच से बिलकुल ही अनजान होते हैं. इसलिए आज मैं आपको यही बताने वाला हूँ की क्या online पैसे कमाना आसान है?

मेरा जवाब है “नहीं”, online से पैसे कमाना बिलकुल भी आसान नहीं है. online से पैसे कमाने के लिए भी आपको कड़ी मेहनत और लगन की जरुरत है. दुनिया में ऐसा कोई भी काम नहीं जिससे आप बिना मेहनत किये ही पैसे कमा सकते हैं. जैसे किसी कंपनी में job कर पैसे कमाने के लिए भी 8 से 10 घंटे तक काम करना पड़ता है, व्यापर में भी आपको हर वक़्त अपने सूझ बुझ से दिमाग लगा कर काम करना पड़ता है.

ठीक वैसे ही online से पैसे कमाने के लिए भी आपको बहुत मेहनत की जरुरत पड़ती है. online से पैसे कमाना बाकि सभी कामो से भी कठीन होता है.रातो रात कोई भी अमीर नहीं बनता, अमीर बनने के लिए बहुत से परेशानी और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.



ONLINE पैसे कमाने के लिए क्या करना चाहिए ?

आप ने बहुत सारे popular website और blog के बारे में सुना होगा, आपको क्या लगता है की उनका website और blog कैसे popular हुआ होगा? इसके लिए उन्होंने बहुत परिश्रम, सच्ची लगन और पूरा dedication के साथ रात भर जग कर अपने blog के लिए काम किया है. बहुत से blog में अपने पढ़ा होगा की आप अपना एक website खोल कर आसानी से पैसे कमाना शुरू कर सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा होता तो India के सभी लोग अपना job छोड़ कर online ही website या blog बना कर पैसे कमाना शुरू कर देते.

इसमें कोई शक नहीं आप online से पैसे कमा सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको अच्छी skill और creativity की जरुरत पड़ती है. अगर आपके पास ये है तो आप मेहनत और सब्र से online से बहुत पैसे कमा सकते हैं. online से पैसे कमाने के लिए आपको किसी एक चीज़ पर expert होना बहुत जरुरी है जैसे internet का सही तरीके से इस्तेमाल करने का ज्ञान होना चाहिए, web design के बारे में पता होना चाहिए, English भासा में पढने और लिखने में महारथ हासील होना चाहिए. इन सभी चीजों के बारे में आपको पूरी तरह से ज्ञान है तो आपके लिए online से पैसे कमाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं.


अगर आपने आधी अधूरी ज्ञान से ही online पैसे कमाना शुरू कर दिया तो आप ज्यादा दिन इस रास्ते पर टिक नहीं पाएंगे. मै बस इतना ही बताना चाहता हूँ की online से पैसे कमाना कोई आसान काम नहीं इसके लिए आपके पास हुनर, जानकारी और सब्र होना चाहिए. आसा करता हूँ के आप समझ गए होंगे के में क्या समझाना चाहता था. अगर आप किसी article को पढ़ कर इसी रास्ते पे चल पड़े है तो अभी भी समय है, यहाँ रुक जाईये. अगर आपके पास proper knowledge है, तभी आगे बढे; क्यूँ की समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता.


GOOGLE PRIVACY TIPS IN HINDI

दोस्तों! एक बहुत ही जाने माने आईटी प्रोफेशनल और हिंदी लेखक है – बालेंदु शर्मा दधिची। इनके ब्लॉग पे जो भी जानकारी या मुद्दा होता है वो अपने आप में बहुत ही उम्दा किस्म का होता है। आज इनकी ब्लॉग पे मैंने एक लेख पढा – Google Privacy Tips – इंटरनेट अपनाने के लिए प्राइवेसी खोना ज़रूरी क्यों है ? मुझे ये लेख बहुत ही अच्छा लगा। ये लेख मैं आप लोगो से शेयर कर रहा हु अगर अच्छा लगे तो कमेंट जरूर कीजियेगा।



इंटरनेट अपनाने के लिए प्राइवेसी खोना ज़रूरी क्यों है ?

Google की नई, एकीकृत पॉलिसी कोई तकनीकी चीज़ नहीं है, यह आप−हम जैसे इंटरनेट उपयोक्ताओं को सीधे प्रभावित करेगी। इसके तहत Google की तमाम सर्विसेज में आपका दिया ब्यौरा, आपकी इंटरनेट सर्च, आपके देखे मसालेदार वीडियोज, पोर्नोग्राफिक तसवीरें, आपकी ईमेल में आने वाले संदेश, Google Maps में ढूंढे गए ठिकाने, कैलेंडर में दर्ज की गई तारीखें, Google Plus में हुई बातें और बने दोस्तों का ब्यौरा इकट्ठा करके आपके निजी डेटा का भंडार बना लिया जाएगा।

इसके आधार पर आपके बारे में ज्यादातर बातें Google को पता चल जाएंगी, जैसे आपका काम, जगह, लिंग, उम्र, पसंद− नापसंद, वैवाहिक स्थित, कामिकाज, इंडस्ट्री, शौक, आर्थिक स्थित, अच्छिइयाँ, कमजोरियाँ, बीमारियाँ, आपका शिड्यूल, यात्रा की तारीखें, नेट पर खोजी गई तसवीरें, देखे गए वीडियो, देखी गई वेबसाइटें और न जाने क्या−क्या।

पहले भी Google आपकी जानकारियों पर नजर रखता था, उन्हें सहेजता भी था लेकिन फिर भी अलग−अलग सर्विस में वे अलग−अलग रहती थीं। अब वे सब मिलने जा रही हैं। यानी आँख, नाक, कान, मुँह, सिर, धड़, टांगें.. सब अलग−अलग जरियों से लाकर एक साथ मिलाए जा रहे हैं। इस तरह बन जाएगी आपकी पूरी तसवीर। आप चाहें या न चाहें।


जानकारियों का यह भंडार दूसरों के भी हवाले किया जा सकता है, Google से बाहर की कंपनियों, संगठनों, लोगों और विज्ञापनदाताओं को भी जो किसी न किसी रूप में Google के सहयोगी या एफीलिएट हैं। नई पॉलिसी को लेकर पश्चिम और पूरब के तकनीकी विशेषज्ञों, प्राइवेसी के हिमायतियों, कानून के दिग्गजों और राजनीति के पंडितों के बीच हंगामा सा बरपा है। आम यूज़र्स की तो बात ही छोड़ दीजिए। आपकी प्राइवेट जानकारियां अब ‘प्राइवेट’ नहीं रह जाएंगी, बल्कि Google के डेटाबेस का हिस्सा बन जाएंगी।

सवाल उठे हैं कि Google इन सूचनाओं का क्या करेगा? उन्हें कब और किसे मुहैया करा देगा? उनकी कितनी सुरक्षा कर पाएगा? उनके आधार पर आपसे कब और कैसा फायदा उठाएगा? सबसे बड़ा सवाल जो उठा है वह यह कि तब आपकी प्राइवेसी का क्या बचा रह जाएगा?आपको भी फर्क पड़ेगा जिन लोगों का कामकाज, दायरा और इंटरनेट सर्फिंग बहुत सीमित है, उन्हें शायद बहुत फर्क़ न पड़े।

अगर आप एक आदर्श इंसान हैं, जिसने कभी कोई गलत काम नहीं किया और जिसका सब कुछ ठीकठाक है, उसे भी अपनी सूचनाओं के लीक हो जाने की शायद ज्यादा चिंता न हो। लेकिन दुनिया में सब लोग आदर्श नहीं हैं। सबके पास छिपाने को कुछ न कुछ है।जो दिन का अच्छा खासा हिस्सा इंटरनेट पर खर्च करते हैं, सोशियल नेटवर्किंग से लेकर ईमेल तक जिनके लिए सिटी ट्रांसपोर्ट से कहीं ज्यादा अहम हैं, जिनके कारोबार में इंटरनेट सर्च की भूमिका है या जो Google के एंड्रोइड अएपरेटिंग सिस्टम से युक्त स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इससे खासा फर्क़ पड़ सकता है।

वही क्यों, Google Talk, Chat, Gmail, YouTube, Google Plus, Maps और ऐसी ही ढेरों दूसरी सेवाओं पर लॉगिन करने वाले बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी के पास खोने के लिए एक अदद प्राइवेसी है। अएनलाइन संदेश लेने−देने वाले प्रेमियों से लेकर अपनी बीमारियों के बारे में विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करने वालों और Google कैलेंडर के जरिए अपने शिड्यूल्स का हिसाब−किताब रखने वालों से लेकर ब्लॉगों में टिप्पणियाँ करने वालों तक के पास चिंतित होने की कई वजहें हैं।

आपकी आपत्तिजनक बेनामी टिप्पणी का सोर्स भले ही ब्लॉग चलाने वाले को पता न चले लेकिन याद रखिए, Google को पता है। आपकी बीमारी के बारे में भले ही घरवालों तक को पता न हो, मगर.. Google सब कुछ जानता है। आपको अचानक कितना आर्थिक लाभ हुआ जिसे आपने बड़े जतन से सेपरेट अकाउंट में रखा हुआ है, यह तथ्य भले ही आपके घरवाले न जानें लेकिन बहुत संभव है कि Google उसे जानता हो। शायद आपने अपने किसी ईमेल संदेश में किसी से इसका जिक्र किया हो।


आपने किसी बड़े लेनदेन पर टैक्स बचा लिया है या फिर जाने−अनजाने में किसी गलत इंसान से संपर्क कर बैठे हैं या फिर क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट करके किसी दूसरे शहर में आ बैठे हैं तो कम से कम Google से दूर रहिए। अगर आपके पास Android Based PHones है तो फिर टेलीफोन कॉल्स का ब्यौरा भी जोड़ लीजिए। आपने किसे, कब, कितनी देर तक फोन किया, आपके फोन का ब्रांड, टेलीफोन सर्विस वगैरह सबकी जानकारी Google तक पहुंचेगी।आपकी वह जानकारी संयोग या कुयोग से कब किसी गलत हाथ में पड़ जाए, कौन जाने? बहुत से लोग हैं जिनकी दिलचस्पी ऐसी जानकारी में होगी। मार्केटिंग करने वाले, प्रतिद्वंद्वी कारोबारी समूह और यहाँ तक कि अपराधी भी।

सरकार को तो संदेहास्पद जानकारी मुहैया कराना ईमेल कंपनियों की की कानूनी बाध्यता है ही। और चलिए ये सूचनाएं अगर किसी और के पास न भी पहुँचें तो क्या Google को आपका जुड़ा निजी डेटा अपने पास सहेजकर रखने का हक है? वह भी बरसों बरस? कौन जाने कुछ साल बाद वह इस जानकारी का किसी और ढंग से इस्तेमाल करने का फैसला कर ले, जिसका आज हमें अनुमान भी नहीं है?अगर आप सोचते हैं कि आप इस अएप्शन को सक्रिय ही नहीं करेंगे तो यह संभव नहीं है।

इस ब्रह्मास्त्र में बचाव का विकल्प यूज़र को नहीं दिया जा रहा। अगर आप Google की किसी भी सेवा का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको इसे मानना ही होगा। अगर नहीं मानना चाहते तो बस एक ही विकल्प है और वह है Google से पूरी तरह अलग हो जाना।

ताज्जुब होता है न? अगर आपकी ईमेल को दफ्तर का कोई साथी, पड़ोसी और यहाँ तक कि आपके घर का कोई सदस्य भी आपकी पीठ पीछे पढ़ रहा हो तो यह साइबर क्राइम माना जाएगा। पुलिस और सीबीआई को भी अगर किसी का टेलीफोन टेप करना है तो उसे केंद्र या राज्य सरकार की इजाजत लेनी पड़ती है। लेकिन यहाँ Google हमारी निजी जानकारियों पर नजर रखने और उन्हें सहेजने के लिए आज़ाद है। वजह है उसकी प्राइवेसी पॉलिसी, जिसे हम जीमेल और दूसरी Google सेवाओं के सदस्य बनते समय आम तौर पर बिना पढ़े ही मंजूर कर लेते हैं। कानूनी तौर पर Google सुरक्षित है लेकिन नैतिक तौर पर?





दुनिया भर में विरोध

अमेरिका में करीब चालीस राज्यों के एटॉर्नी जनरलों ने इस प्राइवेसी पॉलिसी का विरोध किया है। यूरोप के कई देशों ने इस पर विरोध जताया है और प्राइवेसी राइट्स एक्टीविस्ट इस बात पर ऐतराज कर रहे हैं कि Google अपने सभी यूज़र्स को अपने उत्पाद के रूप में दुनिया भर में फैले विज्ञापनदाताओं के सामने पेश कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने भी इसकी कड़ी आलोचना की है। दुनिया भर के अखबारों, टेलीविजन चैनलों और सोशियल नेटवर्किंग ठिकानों और ब्लॉगों पर लोगों का गुस्सा फूटा पड़ रहा है।

लेकिन Google टस से मस होने को तैयार नहीं। कुछ महीनों से Gmail. Blogger वगैरह के यूज़र्स को ऐसी विंडोज दिखाई जा रही थीं, जिनमें उनका टेलीफोन नंबर मांगा जा रहा था। बहुतों ने दे भी दिया, हालाँकि उसी पेज पर छोटा सा लिंक इसे अनदेखा करते हुए आगे बढ़ने का भी था जो ज्यादातर लोगों की नजर में नहीं आया। शायद आपको अंदाजा लगा हो कि जानकारी कितनी स्पेसीफिक है।

Google की सफाई है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी लाने के दो खास मकसद हैं− पहला, बहुत सारी पॉलिसीज को एक अकेले दस्तावेज में बदलकर सिम्पल बना देना, और दूसरा, यूज़र्स को बेहतर सर्च और सुविधाएँ मुहैया कराना (देखें बॉक्स)। लेकिन आईटी जगत के जानकारों का कहना है कि इसकी कारोबारी वजहें हैं। फेसबुक तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया की नंबर एक इंटरनेट कंपनी के रूप में Google का साम्राज्य खतरे में है। उसकी सोशियल नेटवर्किंग साइट Google प्लस के यूज़र्स की संख्या अभी फेसबुक के आठवें हिस्से तक ही पहुंची है।

उधर मुनाफे के मामले में एपल ने कमाल कर दिया है। दिसंबर 2012 में खत्म हुई तिमाही में उसने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है। फेसबुक का भारी−भरकम आईपीओ आने वाला है जो 2012 में आईटी जगत की सबसे बड़ी खबर बनेगा। Twitter भी लगातार खबरों में बना हुआ है। इधर Google की पिछली तिमाही की आय अनुमान से कम रही है।


Google पर दबाव है अपने विज्ञापनों को ज्यादा असरदार और प्रोफिटेबल बनाए, जिसके लिए जरूरी है कि हर यूज़र को उसकी जरूरतों तथा पसंद−नापसंद के लिहाज से विज्ञापन दिखाए जाएँ ताकि वह उन्हें क्लिक करे और Google की आमदनी बढ़े। आपके बारे में जितना ज्यादा डेटा उसके पास होगा, उसकी विज्ञापन प्रणाली उतने ही बेहतर नतीजे देगी।

दूसरा दबाव है अपनी सर्विसेज को और बेहतर बनाने का ताकि उससे जुड़ने वाले यूज़र्स की संख्या बढ़ती रहे। अब यह बात अलग है कि Google का ताजा फैसला उल्टा भी पड़ सकता है क्योंकि प्राइवेसी को अहमियत देने वाले बहुत से यूज़र Google से अलग होने का फैसला कर सकते हैं। Microsoft और Facebook मौके का फायदा उठाने में जुट भी गए हैं। वे अपनी−अपनी सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित बताते हुए प्रचार अभियान चला रहे हैं।

सवाल उठता है कि यूज़र क्या करे? Google की कई सेवाएँ इतनी अच्छी हैं कि उनसे पूरी तरह हाथ झाड़ लेना संभव नहीं है। लेकिन जिसे आप अपना सबसे भरोसेमंद दोस्त समझते थे वह सरे−बाजार आपकी ही बोली लगाए दे रहा है! आखिर करें तो क्या करें? कहते हैं कि दुनिया में कोई चीज़ मुफ्त नहीं मिलती। सबकी कोई न कोई कीमत है। Google के मामले में वह कीमत है आपकी प्राइवेसी। फैसला आपको ही करना है कि क्या आप यह कीमत अदा करने के लिए तैयार हैं?

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