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आज हम जानेंगे What is SEO in Hindi यानि SEO क्या है ? दोस्तों पिछली लेख में हमने जाना था की क्या online पैसे कमाना आसान है ? Blogging भी एक ऐसा platform है जो आपको online से पैसे कमाने का जरिया देता है. simplegyan.com में मैंने आपको blogging से related बहुत सी जानकारियां दी हैं जो आपके blog को सफल बनाने के काफी काम आ सकती है.



लेकिन उन सभी चीजों से भी ज्यादा जरुरी चीज जो blogging के career में सफलता पाने के लिए बहुत ही माइने रखती है वो है SEO. आज की इस पोस्ट में आप जान पायेगे की Search Engine Optimization क्या है और ये किसी Blog या Website के लिए क्यूँ और कितनी जरुरी है?



WHAT IS SEO (IN HINDI) – SEO क्या है?

सबसे पहले SEO का full form है Search Engine Optimization. Search engine क्या है ये हम सभी को पता है. Google पूरी दुनिया का सबसे popular search engine है इसके अलावा Bing, Yahoo जैसे और भी search engine मौजूद है. SEO के मदद से हम अपने blog को सभी search engine पर No.1 position पर रख सकते हैं.


जैसे मान लीजिये हम Google में जाकर कुछ भी keyword type कर search करते हैं तो उस keyword से related जितने भी contents होते हैं वो आपको Google दिखा देता है. ये contents जो हमे नज़र आते हैं वो सभी अलग अलग blog से आते हैं. जो result हमे सबसे ऊपर दिखाई देता है वो Google में No.1 rank पर है तभी वो सबसे ऊपर अपनी जगह बनाये रखा है. No.1 पर है मतलब की उस blog में SEO का बहुत अच्छी तरीके से इस्तेमाल किया गया है जिससे की उसमे ज्यादा visitors आते है और इसी वजह से वो blog मसहुर हो गया है.

ये हमारे blog को Google में No.1 rank पर लाने के लिए सहायता करता है. ये एक तकनीक है जो आपके website को search engine के search result पर सबसे ऊपर रख उसमे visitors की संख्या को बढाती है. आपका website search result में सबसे ऊपर हो तो internet user सबसे पहले आपके site में ही visit करेंगे जिससे आपके site में ज्यादा से ज्यादा traffic होने की संभावना बढ़ जाती है और आपकी income भी अच्छी होने लगती है. अपने website पे Organic traffic बढ़ाने के लिए SEO का इस्तेमाल करना बहुत जरुरी है.




SEO किसी BLOG या WEBSITE के लिए क्यूँ जरुरी है?

आप ने जान लिया की SEO क्या है, चलिए अब जानते हैं की ये blog के लिए क्यूँ जरुरी है. अपने website को लोगों तक पंहुचाने के लिए हम SEO का इस्तेमाल करते हैं. मान लीजिये मैंने एक website बना लिया उसमे अच्छे अच्छे high quality contents भी publish कर दिया लेकिन अगर मैंने SEO का इस्तेमाल नहीं किया तो मेरा website लोगों तक नहीं पहुँच पायेगा और मेरे website बनाने का भी कोई फायेदा नहीं होगा.

अगर हम SEO का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो जब भी कोई user कोई keyword search करेगा तो आपके website में उस keyword से related अगर कोई content मौजूद है तो user आपके website को access नहीं कर पायेगा क्यूंकि search engine हमारे site को ढूंढ नहीं पायेगा ना ही हमारे website के content को अपने database पर store कर पायेगा, जिससे आपके website में traffic होना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा.

इसे समझना इतना भी मुश्किल नहीं है अगर आपने इसे सिख लिए तो अपने blog को बहुत ही बेहतर बना सकते हैं और उसकी value search engine में बढ़ा सकते हैं. इसको सिख लेने के बाद जब उसका इस्तेमाल अपने blog के लिए करते हैं तो आपको उसका result तुरंत नहीं दिखेगा इसके लिए आपको धैर्य रख कर अपना काम करते रेहने होगा. क्यूंकि सब्र का फल मीठा होता है और आपकी मेहनत का रंग आपको जरुर दिखेगा.



SEO कितने प्रकार के होते हैं – Search Engine Optimization Techniques

ये दो प्रकार के होते हैं एक है Onpage SEO और दूसरा है Offpage SEO. इन दोने का काम बिलकुल अलग है चलिए हम इनके बारे में भी जान लेते हैं.


On page SEO

इसका काम आपके blog में होता है. इसका मतलब है की अपने website को ठीक तरह से design करना जो SEO friendly हो. SEO के rule को follow कर अपने website में template का इस्तेमाल करना. अच्छे contents लिखना और उनमे अच्छे keywords का इस्तेमाल करना जो search engine में सबसे ज्यादा खोजी जाती है. Keywords का इस्तेमाल page में सही जगह करना जैसे Title, Meta description, content में keyword का इस्तेमाल करना इससे Google को जानने में आसानी होती है की आपका content किसके ऊपर लिखा गया है और जल्दी आपके website को Google page पर rank करने में मदद करता है जिससे आपके blog की traffic बढती है.

Off-Page SEO

इसमें सारा काम blog के बाहार होता है. इसमें हमे अपने blog का promotion करना होता है जैसे बहुत से popular blog में जाकर उनके article पर comment करना और अपने website का link submit करना इसे हम backlink कहते हैं. Backlink से website को बहुत फायेदा होता है. social networking site जैसे Facebook, twitter, Google+ पर अपने website का attractive page बनाइये और अपने followers बढाइये इससे आपके website में ज्यादा visitors बढ़ने के chances होते हैं. बड़े बड़े blogs में जो बहुत ही मसहुर हैं उनके blog पर guest post submit करीए इससे उनके blog पे आने वाले visitors आपको जानने लगेंगे और आपके website पर traffic आना शुरू हो जायेगा.

आप सब समझ ही गए होंगे के What is SEO in Hindi (SEO क्या है). अगर आपको इस पोस्ट से जुडी कोई और जानकारी चाहिए तो कमेंट करके जरुर बताए.

Online Money – ये तो सभी लोग जानते है की दुनिया में सभी लोग पैसे कमाना चाहते हैं. पैसे कमाना के बहुत सारे रास्ते हैं जैसे किसी अच्छी कंपनी में join करके पैसे कमा सकते हैं या अपना खुद का व्यापर शुरू करके कम सकते हैं, या फिर online से घर बैठे पैसे कमा सकते हैं. पैसे कमाने का जरिया चाहे जो भी हो मेहनत सभी कामो में लगती है. और आपको पैसे भी तभी मिलते हैं जब आप मेहनत करते हैं |



तो आज के इस विषय Online Money में, में आपसे अपना खुद का कुछ experience share करना चाहुगा और आपको ये बताने की कोशिश करुँगा के क्या आप घर बैठे पैसे कमा सकते है? क्या ये इतना आसान है?



ONLINE MONEY – ONLINE पैसा कमाना कितना आसान, कितना मुश्किल?

हम सभी का बचपन से ही सपना होता है की हम अच्छे से पढाई कर बड़े होकर अच्छी नौकरी करेंगे, पैसे कमायेंगे और अपना और अपने माँ बाप का सपना पूरा करेंगे. लेकिन हमे सच तो तभी पता चलता है जब हम अपनी पढाई पूरी कर लेते हैं और नौकरी करने, पैसे कमाने का असली वक़्त आता है. नौकरी के लिए हम हर जगह interview देते हैं, बहुत ही भाग दौड़ करना पड़ता है. बहुत कोशिशो के बाद भी हमे नौकरी नहीं मिलती तो हम अपना खुद का व्यापार शुरू करने के बारे में सोचते हैं.

आप में से बहुत लोगों से सुना होगा की online पैसे कमाना आसान है. अगर आप browser में जा कर search करते हैं की Online Money या Online से पैसे कैसे कमायें तो आपको बहुत सारे results मिल जायेंगे जहाँ आपको बहुत सारे tips बताए गए होंगे की आप अगर ऐसा करेंगे तो आप एक दिन में 100 $, 500 $ कमा सकते हैं वो भी बिना मेहनत के.

मगर ऐसा बिलकुल नहीं होता, जिन लोगों को online पैसे कमाने के बारे में जानकारी नहीं होती वो इन सब चीजों को सच मान लेते है और वास्तव में सच से बिलकुल ही अनजान होते हैं. इसलिए आज मैं आपको यही बताने वाला हूँ की क्या online पैसे कमाना आसान है?

मेरा जवाब है “नहीं”, online से पैसे कमाना बिलकुल भी आसान नहीं है. online से पैसे कमाने के लिए भी आपको कड़ी मेहनत और लगन की जरुरत है. दुनिया में ऐसा कोई भी काम नहीं जिससे आप बिना मेहनत किये ही पैसे कमा सकते हैं. जैसे किसी कंपनी में job कर पैसे कमाने के लिए भी 8 से 10 घंटे तक काम करना पड़ता है, व्यापर में भी आपको हर वक़्त अपने सूझ बुझ से दिमाग लगा कर काम करना पड़ता है.

ठीक वैसे ही online से पैसे कमाने के लिए भी आपको बहुत मेहनत की जरुरत पड़ती है. online से पैसे कमाना बाकि सभी कामो से भी कठीन होता है.रातो रात कोई भी अमीर नहीं बनता, अमीर बनने के लिए बहुत से परेशानी और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.



ONLINE पैसे कमाने के लिए क्या करना चाहिए ?

आप ने बहुत सारे popular website और blog के बारे में सुना होगा, आपको क्या लगता है की उनका website और blog कैसे popular हुआ होगा? इसके लिए उन्होंने बहुत परिश्रम, सच्ची लगन और पूरा dedication के साथ रात भर जग कर अपने blog के लिए काम किया है. बहुत से blog में अपने पढ़ा होगा की आप अपना एक website खोल कर आसानी से पैसे कमाना शुरू कर सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा होता तो India के सभी लोग अपना job छोड़ कर online ही website या blog बना कर पैसे कमाना शुरू कर देते.

इसमें कोई शक नहीं आप online से पैसे कमा सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको अच्छी skill और creativity की जरुरत पड़ती है. अगर आपके पास ये है तो आप मेहनत और सब्र से online से बहुत पैसे कमा सकते हैं. online से पैसे कमाने के लिए आपको किसी एक चीज़ पर expert होना बहुत जरुरी है जैसे internet का सही तरीके से इस्तेमाल करने का ज्ञान होना चाहिए, web design के बारे में पता होना चाहिए, English भासा में पढने और लिखने में महारथ हासील होना चाहिए. इन सभी चीजों के बारे में आपको पूरी तरह से ज्ञान है तो आपके लिए online से पैसे कमाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं.


अगर आपने आधी अधूरी ज्ञान से ही online पैसे कमाना शुरू कर दिया तो आप ज्यादा दिन इस रास्ते पर टिक नहीं पाएंगे. मै बस इतना ही बताना चाहता हूँ की online से पैसे कमाना कोई आसान काम नहीं इसके लिए आपके पास हुनर, जानकारी और सब्र होना चाहिए. आसा करता हूँ के आप समझ गए होंगे के में क्या समझाना चाहता था. अगर आप किसी article को पढ़ कर इसी रास्ते पे चल पड़े है तो अभी भी समय है, यहाँ रुक जाईये. अगर आपके पास proper knowledge है, तभी आगे बढे; क्यूँ की समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता.


GOOGLE PRIVACY TIPS IN HINDI

दोस्तों! एक बहुत ही जाने माने आईटी प्रोफेशनल और हिंदी लेखक है – बालेंदु शर्मा दधिची। इनके ब्लॉग पे जो भी जानकारी या मुद्दा होता है वो अपने आप में बहुत ही उम्दा किस्म का होता है। आज इनकी ब्लॉग पे मैंने एक लेख पढा – Google Privacy Tips – इंटरनेट अपनाने के लिए प्राइवेसी खोना ज़रूरी क्यों है ? मुझे ये लेख बहुत ही अच्छा लगा। ये लेख मैं आप लोगो से शेयर कर रहा हु अगर अच्छा लगे तो कमेंट जरूर कीजियेगा।



इंटरनेट अपनाने के लिए प्राइवेसी खोना ज़रूरी क्यों है ?

Google की नई, एकीकृत पॉलिसी कोई तकनीकी चीज़ नहीं है, यह आप−हम जैसे इंटरनेट उपयोक्ताओं को सीधे प्रभावित करेगी। इसके तहत Google की तमाम सर्विसेज में आपका दिया ब्यौरा, आपकी इंटरनेट सर्च, आपके देखे मसालेदार वीडियोज, पोर्नोग्राफिक तसवीरें, आपकी ईमेल में आने वाले संदेश, Google Maps में ढूंढे गए ठिकाने, कैलेंडर में दर्ज की गई तारीखें, Google Plus में हुई बातें और बने दोस्तों का ब्यौरा इकट्ठा करके आपके निजी डेटा का भंडार बना लिया जाएगा।

इसके आधार पर आपके बारे में ज्यादातर बातें Google को पता चल जाएंगी, जैसे आपका काम, जगह, लिंग, उम्र, पसंद− नापसंद, वैवाहिक स्थित, कामिकाज, इंडस्ट्री, शौक, आर्थिक स्थित, अच्छिइयाँ, कमजोरियाँ, बीमारियाँ, आपका शिड्यूल, यात्रा की तारीखें, नेट पर खोजी गई तसवीरें, देखे गए वीडियो, देखी गई वेबसाइटें और न जाने क्या−क्या।

पहले भी Google आपकी जानकारियों पर नजर रखता था, उन्हें सहेजता भी था लेकिन फिर भी अलग−अलग सर्विस में वे अलग−अलग रहती थीं। अब वे सब मिलने जा रही हैं। यानी आँख, नाक, कान, मुँह, सिर, धड़, टांगें.. सब अलग−अलग जरियों से लाकर एक साथ मिलाए जा रहे हैं। इस तरह बन जाएगी आपकी पूरी तसवीर। आप चाहें या न चाहें।


जानकारियों का यह भंडार दूसरों के भी हवाले किया जा सकता है, Google से बाहर की कंपनियों, संगठनों, लोगों और विज्ञापनदाताओं को भी जो किसी न किसी रूप में Google के सहयोगी या एफीलिएट हैं। नई पॉलिसी को लेकर पश्चिम और पूरब के तकनीकी विशेषज्ञों, प्राइवेसी के हिमायतियों, कानून के दिग्गजों और राजनीति के पंडितों के बीच हंगामा सा बरपा है। आम यूज़र्स की तो बात ही छोड़ दीजिए। आपकी प्राइवेट जानकारियां अब ‘प्राइवेट’ नहीं रह जाएंगी, बल्कि Google के डेटाबेस का हिस्सा बन जाएंगी।

सवाल उठे हैं कि Google इन सूचनाओं का क्या करेगा? उन्हें कब और किसे मुहैया करा देगा? उनकी कितनी सुरक्षा कर पाएगा? उनके आधार पर आपसे कब और कैसा फायदा उठाएगा? सबसे बड़ा सवाल जो उठा है वह यह कि तब आपकी प्राइवेसी का क्या बचा रह जाएगा?आपको भी फर्क पड़ेगा जिन लोगों का कामकाज, दायरा और इंटरनेट सर्फिंग बहुत सीमित है, उन्हें शायद बहुत फर्क़ न पड़े।

अगर आप एक आदर्श इंसान हैं, जिसने कभी कोई गलत काम नहीं किया और जिसका सब कुछ ठीकठाक है, उसे भी अपनी सूचनाओं के लीक हो जाने की शायद ज्यादा चिंता न हो। लेकिन दुनिया में सब लोग आदर्श नहीं हैं। सबके पास छिपाने को कुछ न कुछ है।जो दिन का अच्छा खासा हिस्सा इंटरनेट पर खर्च करते हैं, सोशियल नेटवर्किंग से लेकर ईमेल तक जिनके लिए सिटी ट्रांसपोर्ट से कहीं ज्यादा अहम हैं, जिनके कारोबार में इंटरनेट सर्च की भूमिका है या जो Google के एंड्रोइड अएपरेटिंग सिस्टम से युक्त स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इससे खासा फर्क़ पड़ सकता है।

वही क्यों, Google Talk, Chat, Gmail, YouTube, Google Plus, Maps और ऐसी ही ढेरों दूसरी सेवाओं पर लॉगिन करने वाले बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी के पास खोने के लिए एक अदद प्राइवेसी है। अएनलाइन संदेश लेने−देने वाले प्रेमियों से लेकर अपनी बीमारियों के बारे में विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करने वालों और Google कैलेंडर के जरिए अपने शिड्यूल्स का हिसाब−किताब रखने वालों से लेकर ब्लॉगों में टिप्पणियाँ करने वालों तक के पास चिंतित होने की कई वजहें हैं।

आपकी आपत्तिजनक बेनामी टिप्पणी का सोर्स भले ही ब्लॉग चलाने वाले को पता न चले लेकिन याद रखिए, Google को पता है। आपकी बीमारी के बारे में भले ही घरवालों तक को पता न हो, मगर.. Google सब कुछ जानता है। आपको अचानक कितना आर्थिक लाभ हुआ जिसे आपने बड़े जतन से सेपरेट अकाउंट में रखा हुआ है, यह तथ्य भले ही आपके घरवाले न जानें लेकिन बहुत संभव है कि Google उसे जानता हो। शायद आपने अपने किसी ईमेल संदेश में किसी से इसका जिक्र किया हो।


आपने किसी बड़े लेनदेन पर टैक्स बचा लिया है या फिर जाने−अनजाने में किसी गलत इंसान से संपर्क कर बैठे हैं या फिर क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट करके किसी दूसरे शहर में आ बैठे हैं तो कम से कम Google से दूर रहिए। अगर आपके पास Android Based PHones है तो फिर टेलीफोन कॉल्स का ब्यौरा भी जोड़ लीजिए। आपने किसे, कब, कितनी देर तक फोन किया, आपके फोन का ब्रांड, टेलीफोन सर्विस वगैरह सबकी जानकारी Google तक पहुंचेगी।आपकी वह जानकारी संयोग या कुयोग से कब किसी गलत हाथ में पड़ जाए, कौन जाने? बहुत से लोग हैं जिनकी दिलचस्पी ऐसी जानकारी में होगी। मार्केटिंग करने वाले, प्रतिद्वंद्वी कारोबारी समूह और यहाँ तक कि अपराधी भी।

सरकार को तो संदेहास्पद जानकारी मुहैया कराना ईमेल कंपनियों की की कानूनी बाध्यता है ही। और चलिए ये सूचनाएं अगर किसी और के पास न भी पहुँचें तो क्या Google को आपका जुड़ा निजी डेटा अपने पास सहेजकर रखने का हक है? वह भी बरसों बरस? कौन जाने कुछ साल बाद वह इस जानकारी का किसी और ढंग से इस्तेमाल करने का फैसला कर ले, जिसका आज हमें अनुमान भी नहीं है?अगर आप सोचते हैं कि आप इस अएप्शन को सक्रिय ही नहीं करेंगे तो यह संभव नहीं है।

इस ब्रह्मास्त्र में बचाव का विकल्प यूज़र को नहीं दिया जा रहा। अगर आप Google की किसी भी सेवा का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको इसे मानना ही होगा। अगर नहीं मानना चाहते तो बस एक ही विकल्प है और वह है Google से पूरी तरह अलग हो जाना।

ताज्जुब होता है न? अगर आपकी ईमेल को दफ्तर का कोई साथी, पड़ोसी और यहाँ तक कि आपके घर का कोई सदस्य भी आपकी पीठ पीछे पढ़ रहा हो तो यह साइबर क्राइम माना जाएगा। पुलिस और सीबीआई को भी अगर किसी का टेलीफोन टेप करना है तो उसे केंद्र या राज्य सरकार की इजाजत लेनी पड़ती है। लेकिन यहाँ Google हमारी निजी जानकारियों पर नजर रखने और उन्हें सहेजने के लिए आज़ाद है। वजह है उसकी प्राइवेसी पॉलिसी, जिसे हम जीमेल और दूसरी Google सेवाओं के सदस्य बनते समय आम तौर पर बिना पढ़े ही मंजूर कर लेते हैं। कानूनी तौर पर Google सुरक्षित है लेकिन नैतिक तौर पर?





दुनिया भर में विरोध

अमेरिका में करीब चालीस राज्यों के एटॉर्नी जनरलों ने इस प्राइवेसी पॉलिसी का विरोध किया है। यूरोप के कई देशों ने इस पर विरोध जताया है और प्राइवेसी राइट्स एक्टीविस्ट इस बात पर ऐतराज कर रहे हैं कि Google अपने सभी यूज़र्स को अपने उत्पाद के रूप में दुनिया भर में फैले विज्ञापनदाताओं के सामने पेश कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने भी इसकी कड़ी आलोचना की है। दुनिया भर के अखबारों, टेलीविजन चैनलों और सोशियल नेटवर्किंग ठिकानों और ब्लॉगों पर लोगों का गुस्सा फूटा पड़ रहा है।

लेकिन Google टस से मस होने को तैयार नहीं। कुछ महीनों से Gmail. Blogger वगैरह के यूज़र्स को ऐसी विंडोज दिखाई जा रही थीं, जिनमें उनका टेलीफोन नंबर मांगा जा रहा था। बहुतों ने दे भी दिया, हालाँकि उसी पेज पर छोटा सा लिंक इसे अनदेखा करते हुए आगे बढ़ने का भी था जो ज्यादातर लोगों की नजर में नहीं आया। शायद आपको अंदाजा लगा हो कि जानकारी कितनी स्पेसीफिक है।

Google की सफाई है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी लाने के दो खास मकसद हैं− पहला, बहुत सारी पॉलिसीज को एक अकेले दस्तावेज में बदलकर सिम्पल बना देना, और दूसरा, यूज़र्स को बेहतर सर्च और सुविधाएँ मुहैया कराना (देखें बॉक्स)। लेकिन आईटी जगत के जानकारों का कहना है कि इसकी कारोबारी वजहें हैं। फेसबुक तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया की नंबर एक इंटरनेट कंपनी के रूप में Google का साम्राज्य खतरे में है। उसकी सोशियल नेटवर्किंग साइट Google प्लस के यूज़र्स की संख्या अभी फेसबुक के आठवें हिस्से तक ही पहुंची है।

उधर मुनाफे के मामले में एपल ने कमाल कर दिया है। दिसंबर 2012 में खत्म हुई तिमाही में उसने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है। फेसबुक का भारी−भरकम आईपीओ आने वाला है जो 2012 में आईटी जगत की सबसे बड़ी खबर बनेगा। Twitter भी लगातार खबरों में बना हुआ है। इधर Google की पिछली तिमाही की आय अनुमान से कम रही है।


Google पर दबाव है अपने विज्ञापनों को ज्यादा असरदार और प्रोफिटेबल बनाए, जिसके लिए जरूरी है कि हर यूज़र को उसकी जरूरतों तथा पसंद−नापसंद के लिहाज से विज्ञापन दिखाए जाएँ ताकि वह उन्हें क्लिक करे और Google की आमदनी बढ़े। आपके बारे में जितना ज्यादा डेटा उसके पास होगा, उसकी विज्ञापन प्रणाली उतने ही बेहतर नतीजे देगी।

दूसरा दबाव है अपनी सर्विसेज को और बेहतर बनाने का ताकि उससे जुड़ने वाले यूज़र्स की संख्या बढ़ती रहे। अब यह बात अलग है कि Google का ताजा फैसला उल्टा भी पड़ सकता है क्योंकि प्राइवेसी को अहमियत देने वाले बहुत से यूज़र Google से अलग होने का फैसला कर सकते हैं। Microsoft और Facebook मौके का फायदा उठाने में जुट भी गए हैं। वे अपनी−अपनी सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित बताते हुए प्रचार अभियान चला रहे हैं।

सवाल उठता है कि यूज़र क्या करे? Google की कई सेवाएँ इतनी अच्छी हैं कि उनसे पूरी तरह हाथ झाड़ लेना संभव नहीं है। लेकिन जिसे आप अपना सबसे भरोसेमंद दोस्त समझते थे वह सरे−बाजार आपकी ही बोली लगाए दे रहा है! आखिर करें तो क्या करें? कहते हैं कि दुनिया में कोई चीज़ मुफ्त नहीं मिलती। सबकी कोई न कोई कीमत है। Google के मामले में वह कीमत है आपकी प्राइवेसी। फैसला आपको ही करना है कि क्या आप यह कीमत अदा करने के लिए तैयार हैं?

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